arogyanidhi2.JPG

आरोग्यनिधि – 2


निवेदन

घर-घर में पहुँचाओ स्वास्थ्य का खजाना

आजकल देश विदेश में कई जगहों पर मरीज को जरा-सा रोग होने पर भी लम्बी जाँच पड़ताल और अकारण ऑपरेशन करके व लम्बे बिल बनाकर गुमराह करके लूटा जाता है। जिससे समाज की कमर ही टूट गयी है। वैद्यक क्षेत्र से सम्बन्धित इन लोगों के कमीशन खाने के लोभ के कारण मरीज तन, मन और धन से भी पीड़ित हो रहे हैं। कई मरीज बापूजी के पास रोते-बिलखते आते हैं कि 'लाखों रुपये लुट गये, दुबारा-तिबारा ऑपरेशन करवाया, फिर भी कुछ फायदा नहीं हुआ। स्वास्थ्य सदा के लिए लड़खड़ा गया। बापूजी ! अब.....'

पूज्य बापू जी व्यथित हृदय से समाज की दुर्दशा सुनी और इस पर काबू पाने के लिए आश्रम द्वारा कई चल चिकित्सालय एवं आयुर्वैदिक चिकित्सालय खोल दिये। आश्रम द्वारा औषधियों का कहीं निःशुल्क तो कहीं नाममात्र दरों पर वितरण किया जाने लगा। परंतु इतने से ही संत हृदय कहाँ मानता है ? स्वास्थ्य का अनुपम अमृत घर-घर तक पहुँचे, इस उद्देश्य से लोकसंत पूज्य बापू जी ने आरोग्य के अनेकों सरल उपाय अपने सत्संग-प्रवचनों में समय-समय पर बताये हैं। जिन्हें आश्रम द्वारा प्रकाशित पत्रिकाओं 'ऋषि-प्रसाद''दरवेश-दर्शन' तथा समाचार पत्र 'लोक कल्याण सेतु' में समय-समय पर प्रकाशित किया गया है। उनका लाभ लाखों करोड़ों भारतवासी और विदेश के लोग उठाते रहे हैं।

ऋतुचर्या का पालन तथा ऋतु-अनुकूल फल, सब्जियाँ, सूखे मेवे, खाद्य वस्तुएँ आदि का उपयोग कर स्वास्थ्य की सुरक्षा करने की ये सुन्दर युक्तियाँ संग्रह के रूप में प्रकाशित करने की जन जन की माँग 'आरोग्यनिधि-2' के रूप में साकार हो रही है। आप इसका खूब-खूब लाभ उठायें तथा औरों को दिलाने का दैवी कार्य भी करें। आधुनिकता की चकाचौंध से प्रभावित होकर अपने स्वास्थ्य और इस अमूल्य रत्न मानव-देह का सत्यानाश मत कीजिए।

आइये, अपने स्वास्थ्य के रक्षक और वैद्य स्वयं बनिये। अंग्रेजी दवाओं और ऑपरेशनों के चंगुल से अपने को बचाइये और जान लीजिए उन कुंजियों को जिनसे हमारे पूर्वज 100 वर्षों से भी अधिक समय तक स्वस्थ और सबल जीवन जीते थे।

इस पुस्तक का उद्देश्य आपको रोगमुक्त करना ही नहीं, बल्कि आपको बीमारी हो ही नहीं, ऐसी खान-पान और रहन-सहन की सरल युक्तियाँ भी आप तक पहुँचाना है। अंत में आप-हम यह भी जान लें कि उत्तम स्वास्थ्य पाने के बाद वहीं रुक नहीं जाना है, संतों के बताये मार्ग पर चलकर प्रभु को भी पाना है.... अपनी शाश्वत आत्मा-परमात्मा को भी पहचानना है।

श्री योग वेदान्त सेवा समिति,

अमदावाद आश्रम।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

दुर्बल विचारों को हटाने के लिए प्रयोग

मैं शरीर को जानता हूँ, मन को जानता हूँ, इन्द्रियों को जानता हूँ, मन में आये हुए काम, क्रोध, भय आदि के विचारों को जानता हूँ। इसलिए शरीर की अवस्था और मन के सुख-दुःख मुझे स्पर्श नहीं कर सकते....।' ऐसे विचार बार-बार करो। हो सके तो कभी-कभी किसी कमरे में या एकांत स्थान पर अकेले बैठकर अपने आप से पूछोः 'क्या मैं शरीर हूँ ?' खूब गहराई से पूछो। जब तक भीतर से उत्तर न मिले तब तक बार बार पूछते रहो। भीतर से उत्तर मिलेगाः 'नहीं, मैं वह शरीर नहीं हूँ।' तो फिर शरीर के सुख दुःख और उसके सम्बन्धियों के शरीर के सुख-दुःख क्या मेरे सुख-दुःख हैं ?' उत्तर मिलेगाः 'नहीं.... मैं शरीर नहीं तो शरीर के सुख-दुःख और उसके सम्बन्धियों के शरीर के सुख-दुःख मेरे कैसे हो सकते हैं ?' फिर पूछोः ' तो क्या मैं मन या बुद्धि का बार-बार चिन्तन करना दुर्बल विचारों और दुर्भाग्य को निकालने का एक अनुभवसिद्ध इलाज है। इसका प्रयोग अवश्य करना। '' का पावन जप करते जाना और आगे बढ़ते जाना। प्रभु के नाम का स्मरण और परमात्मा से प्रेम करते रहना।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

अनुक्रम

निवेदन.. 2

घर-घर में पहुँचाओ स्वास्थ्य का खजाना... 2

दुर्बल विचारों को हटाने के लिए प्रयोग.. 3

इस पुस्तक में प्रयुक्त कुछ शब्दों के समानार्थी अंग्रेजी शब्द... 5

आयुर्वेदः निर्दोष एवं उत्कृष्ट चिकित्सा-पद्धति.. 6

अंग्रेजी दवाइयों से सावधान ! 7

आयुर्वेद की सलाह के बिना शल्यक्रिया कभी न करवायें.. 9

टॉन्सिल्स की शल्यक्रिया कभी नहीं.. 10

सुखमय जीवन की कुंजियाँ... 12

दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन के नियम.. 15

अपने हाथ में ही अपना आरोग्य... 16

प्रसन्नता और हास्य.... 17

दिनचर्या में उपयोगी बातें. 18

स्नान-विधि... 18

भोजन विधि... 19

तिथि अनुसार आहार-विहार एवं आचार संहिता.. 25

निद्रा और स्वास्थ्य...... 26

क्या आप तेजस्वी एवं बलवान बनना चाहते हैं?. 30

ताड़ासन का चमत्कारिक प्रयोग.. 34

ऋतुचर्या... 34

वसंत ऋतुचर्या... 34

ग्रीष्म ऋतुचर्या... 36

लूः लक्षण तथा बचाव के उपाय.. 38

शरबत. 38

वर्षा ऋतुचर्या... 40

शरद ऋतुचर्या... 41

शीत ऋतुचर्या... 43

शीत ऋतु में उपयोगी पाक.. 47

विविध व्याधियों में आहार-विहार. 50

सब रोगों का मूलः प्रज्ञापराध.. 52

स्वास्थ्य पर स्वर का प्रभाव. 53

उपवास.. 54

फलों एवं अन्य खाद्य वस्तुओं से स्वास्थ्य-सुरक्षा... 57

अमृतफल बिल्व... 57

सीताफल.. 59

सेवफल (सेब) 60

अनार. 61

आम.. 62

अमरूद (जामफल) 63

तरबूज.. 63

पपीता.. 64

ईख (गन्ना) 65

बेर. 66

नींबू. 67

जामुन.. 68

फालसा... 69

आँवला... 71

गाजर. 72

करेला... 74

जमीकन्द (सूरन) 76

अदरक.. 77

हल्दी एवं आमी हल्दी.... 78

खेखसा (कंकोड़ा) 79

धनिया... 80

पुदीना... 81

पुनर्नवा (साटी) 83

परवल.. 85

हरीतकी (हरड़) 87

लौंग.. 89

दालचीनी... 91

मेथी... 93

जौ... 94

अरंडी.. 95

तिल का तेल.. 97

गुड़. 98

सूखा मेवा.. 99

बादाम.. 100

अखरोट. 100

काजू.. 101

अंजीर. 102

चारोली... 103

खजूर. 104

पृथ्वी के अमृतः गोदुग्ध एवं शहद. 105

स्वास्थ्य-रक्षक अनमोल उपहार. 107

तुलसी... 107

नीम.. 112

तक्र (छाछ) 113

गाय का घी... 113

रोगों से बचाव. 115

आँखों की सुरक्षा... 118

दंत-सुरक्षा... 123

गुर्दे के रोग एवं चिकित्सा.... 123

यकृत चिकित्सा.... 127

हृदयरोग एवं चिकित्सा.... 128

क्रोध की अधिकता में........... 131

आश्रम द्वारा निर्मित जीवनोपयोगी औषधियाँ... 132

गोझरण अर्क.. 132

अश्वगंधा चूर्ण.. 132

हींगादि हरड़ चूर्ण.. 134

रसायन चूर्ण.. 134

संतकृपा चूर्ण.. 135

त्रिफला चूर्ण.. 136

आँवला चूर्ण.. 138

शोधनकल्प... 138

पीपल चूर्ण.. 138

आयुर्वेदिक चाय.. 139

मुलतानी मिट्टी.. 139

सुवर्ण मालती.. 140

रजत मालती.. 140

सप्तधातुवर्धक वटी.. 141

संत च्यवनप्राश.. 141

मालिश तेल.. 142

आँवला तेल.. 143

नीम तेल.. 143

संतकृपा नेत्रबिन्दु... 143

कर्णबिन्दु... 144

अमृत द्रव. 144

दंतामृत.